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साहस ही सफलता की सीढ़ी है

साहस ही सफलता की सीढ़ी है।




 क्या आप जानते हैं जो बाञ पक्षी होता है, उसकी उम्र करीब 80 साल की होती है। और जब वह 40 साल का होता है उस वक्त उसके जो नाखून और जो पंजे होते हैं और उसकी जो चोच होती है वह बहुत ही कमजोर हो जाती है। जैसे कि हम जानते हैं, बाज पक्षी अपनी चोच और नाखून से ही अपना शिकार करता है। बुढ़ापे में अपनी चोच और नाखून कमजोर हो जाने से वह अपना शिकार ठीक से नहीं कर पाता और वह भूखा ही रहता है। उस वक्त उसके पास केवल दो ही विकल्प शेष रहते हैं, एक जैसी स्थिति है वैसे ही रहे और वह खुद भुखा ही मर जाए, और दूसरी वह अपनी चोच और नाखून को पथऱ पर पटक पटक के तोड़ दे ताकि दूसरे नए चोच और नाखून जाए और वह फिर से वैसे ही शिकार कर पाए। पत्थर पर अपनी चोच और नाखून को पटक पटक कर काटने से उसको अपार कष्ट सहन करना पड़ता है, किंतु आपको यह जानकर आश्चर्य होगा बाज पक्षी दूसरा विकल्प चुनता है और वह पत्थर पर पटक पटक कर अपनी चोच और नाखून को काट देता है। अपनी चोच और नाखून को कट जाने से उसे अपार तकलीफ का सामना करना पड़ता है और वह उस सारे दर्द से उस सारी तकलीफ से गुजरता है वह कइ दिनो तक लगभग भुखा ही रहता है और कुछ ही समय के बाद जैसे ही उसके नई चोच और नई नाखून आ जाते हैं तो फिर से पहले जैसे ही और पहले जैसी ताकत से ही फिर से वह अपना शिकार करता है।
  फ्रेंड सफल व्यक्ति और आम व्यक्ति में यही अंतर होता है। जो सफल व्यक्ति होता है वह अपने कंफर्ट जॉन से बाहर निकल के अपार कष्ट सहन करके अपार मेहनत करके बाज कि तरह सफलता की सीढ़ियों पर चढ़ते हैं। एसा व्यक्ति कभी यह नहीं सोचते कि अगर मैं सफल नहीं हुआ तो क्या होगा, अगर मैं सफल नहीं हो तो जो आज मेरे पास है वह भी चला जाएगा। किंतु जो उसके पास है उसको लेकर उसको दाव पर लगा वह आगे बढ़ते हैं और विश्वास कीजिए ऐसे लोग ही सफल होते हैं। जो बार-बार सोचते हैं और जो अपने कंफर्ट जोन से बाहर नहीं निकलना वह लोग कभी भी सफल नहीं होते चाहे उनमें कितनी भी क्षमता क्यों ना हो, क्योंकि केवल क्षमता ही सब कुछ नहीं है साथ में रिस्क भी उठाने की क्षमता होनी चाहिए। जो व्यक्ती रिस्क नहीं उठाता वह कभी भी सफल नहीं होगा। इसलिए यदि आपने क्षमता है तो आप भी अपने जीवन में थोड़ा सा रिस्क उठाई क्योंकि बिना रिस्क आप कभी भी सफल नहीं हो सकते। आप कोई भी सफल व्यक्ति की जीवनी ले लीजिए उसमें देखे बिना रिस्क लिए वह कभी सफल हो ही नहीं सकता। उसके विपरीत यदि कोई व्यक्ति में थोड़ी कम क्षमता है किंतु यदि उसमें रिस्क उठाने का साहस है तो वह भी सफलता के शिखर को छू सकता है। इसलिए अपने आप पर विश्वास कीजिए, अपनी क्षमता पर विश्वास कीजिए और थोड़ा सा जीवन में रिस्क उठाई। आपको सफलता के लिए किसी की आवश्यकता नहीं रहेगी और ना ही कोई आपको रोक पाएगा।

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