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Think out of box




सैकड़ों साल पहले एक राज्य में एक ऋण-शार्क रहता था। वह बहुत ही बदसूरत, लालची और मतलबी था। वह छोटे व्यवसायियों को ब्याज पर ऋण देता था, और उसको ना लौटा पाने पर वह उस पर बहुत ही जुल्म करता था। वह बहुत ही निर्दई था। ऋण के लिए वह उस व्यापारी को पूरी तरह से बर्बाद कर देता था।


एक बार ऐसे ही उसने एक छोटे से व्यापारी को ऋण दिया। व्यापारी की एक बहुत ही सुंदर कन्या थी। उस ऋण-शार्क की नजर उस कन्या पर थी। किसी कारणवश वह व्यापारी उसका ऋण नहीं चुका पा रहा था। 1 दिन ऋण-शार्क उस व्यापारी के घर पर गया और कहा,'मैं आपका ऋण माफ करने के लिए तैयार हूं किंतु मेरी एक शर्त है इस थैले में मैं दो पत्थर रख लूंगा एक सफेद और एक काला आपकी बेटी को इसमें से एक पत्थर निकालना होगा, अगर वह काला पत्थर निकालते हैं तो मैं आपका ऋण क्षमा कर दूंगा किंतु आपकी बेटी को मुझ से विवाह करना पड़ेगा, और यदि वह सफेद पत्थर निकालते हैं तो मैं आपका ऋण भी क्षमा कर दूंगा और आपकी बेटी को भी मुझ से विवाह करने की आवश्यकता नहीं है।' यह  एक बहुत ही घृणित प्रस्ताव था, किंतु उस व्यापारी के पास उस प्रस्ताव को मानने के सिवा और कोई विकल्प नहीं था।

उस ऋण-शार्क ने उस व्यापारी के बगीचे में से दो पत्थर उठाएं, और थैले में डाल दिया। उस व्यापारी की बेटी ने देखा कि उसने दोनों ही काले पत्थर उठाए थे। तब उसके पास केवल तीन विकल्प थे।

1.  उस पत्थर को ले लेने से इनकार कर देती।
2.  दोनों कंकड़ को बेग से बाहर निकालकर उस ऋण-शार्क को  बेनकाब  कर देती ।
3,  चुपचाप काला पत्थर उठाकर अपने पिता के लिए अपने आप को बलिदान  कर  देती।

उस कन्या ने थैले में से एक  कंकड़ निकाला, उससे पहले कि वह कोई उसे देख पाए उसने 'गलती से' वह कंकड़ गिरा दिया वह कंकड़ अन्य कंकड़ में मिल गया। उसने  ऋण-शार्क को   कहा; “ओह, मैं कितना अनाड़ी हूं। कोई बात नहीं, यदि आप उस बचे हुए कंकड़ को देखते हैं, तो आप बता पाएंगे कि मैंने कौन सा कंकड़ उठाया। "

बचा हुआ पत्थर स्पष्ट रूप से काला ही था, किंतु यह बात ऋण-शार्क उजागर नहीं कर पाया कि, उस कन्या ने जो पत्थर उठाया था वह सफेद नहीं किंतु काला था। इस तरह उस कन्या ने अपनी बुद्धि चातुर्य से अपने आपको भी बचा लिया और अपने पिता के ऋण को भी माफ करवा दिया।

 कई बार हमारे जीवन में ऐसी परिस्थितियां आती हैं कि हम कोई भी विकल्प पसंद करें फिर भी हम  घाटे में ही रहते हैं। ऐसे समय में शांत दिमाग से शांत मन सेहमें आउट ऑफ बॉक्स सोचने की आवश्यकता होती है। हमारी यह विडंबना होती है कि हम में से अधिकतर लोग आउट ऑफ बॉक्स थिंकिंग कर ही नहीं सकते। हम यह सोच ही नहीं सकते हैं कि इससे अलावा भी कोई और विकल्प हो सकते हैं।

इसलिए आप भी आउट ऑफ बॉक्सिंग Thing करने की आदत डालें। आप अपने जीवन में कई तकलीफ से बहुत ही आसानी से बच जाएंगे।

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