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अगस्त, 2020 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

polish your skills in hindi

  एक  बार एक शिष्य अपने गुरु से एक प्रश्न पूछता है, 'हे गुरुजी हमारे जीवन की कीमत क्या है?' गुरु जी थोड़ा सा मुस्कुराए और उसने एक लाल पत्थर उसको दिया और कहा कि यह बाजार में जाकर उसकी सही कीमत क्या है यह पता करो और याद रखना उसको बेचना नहीं है पर उसको सही कीमत क्या है वही पता करना है। वह शिष्य बाजार गया। सबसे पहले उसने एक फल वाले को देखा और उसको वह लाल पत्थर बताया और ‘पूछा इसकी कीमत क्या है?’ उसने पत्थर को देखा और कहा कि ‘पत्थर की तो मैं क्या कीमत दू? पर यदि तुम लाये हो तो मैं दो तीन फल दे दूंगा।‘ शिष्य ने पत्थर वापस लिया फिर वह सब्जी वाले के पास गया। सब्जी वाले ने पत्थर को देखा और कहा, ‘इसकी कोई कीमत नहीं है। यदि तुम लाए हो तो मैं तुम्हें 1 किलो आलू दे देता हूॉ’ फिर वह सुनार के पास जाता है। और सुनार से पूछता है, 'इसकी कीमत क्या है?' सुनारने पत्थर को देखा और थोड़ी देर बाद उसने कहा कि, 'मैं उसके तुम्हे 15 लाख रुपया देता हूं।' यह सुनकर वह बहुत आश्चर्यचकित रह गया और उसने कहा, 'ठीक है मैं बाद में आऊंगा' कहके वह चला गया। क्योंकि गुरु जी ने कहा था कि उसको बेचना

hard work always pays off ( कड़ी मेहनत हमेशा भुगतान करती है )

कड़ी मेहनत हमेशा भुगतान करती है नारियल के पेड़ बड़े ही ऊँचे होते हैं और देखने में बहुत सुंदर होते हैं।  एक बार एक नदी के किनारे नारियल का पेड़ लगा हुआ था।  उस पर लगे नारियल को अपने पेड़ के सुंदर होने पर बहुत गर्व था। सबसे ऊँचाई पर बैठने का भी उसे बहुत मान था।  इस कारण घमंड में चूर नारियल हमेशा ही नदी के पत्थर को तुच्छ पड़ा हुआ कहकर उसका अपमान करता रहता।  एक बार, एक शिल्प कार उस पत्थर को लेकर बैठ गया और उसे तराशने के लिए उस पर तरह – तरह से प्रहार करने लगा। यह देख नारियल को और अधिक आनंद आ गया उसने कहा – ऐ पत्थर ! तेरी भी क्या जिन्दगी हैं पहले उस नदी में पड़ा रहकर इधर- उधर टकराया करता था और बाहर आने पर मनुष्य के पैरों तले रौंदा जाता था और आज तो हद ही हो गई।  ये शिल्पी तुझे हर तरफ से चोट मार रहा हैं और तू पड़ा देख रहा हैं।  अरे ! अपमान की भी सीमा होती हैं | कैसी तुच्छ जिन्दगी जी रहा हैं।  मुझे देख कितने शान से इस ऊँचे वृक्ष पर बैठता हूँ।  पत्थर ने उसकी बातों पर ध्यान ही नहीं दिया | नारियल रोज इसी तरह पत्थर को अपमानित करता रहता।  कुछ दिनों बाद, उस शिल्पकार ने पत्थर को तराश कर भगवान की मूर्ति बनाये

honesty is the best policy

  ((दो कीमती हीरे))) एक सौदागर को बाज़ार में घूमते हुए एक उम्दा नस्ल का ऊंट दिखाई पड़ा।सौदागर और  ऊंट बेचने वाले के बीच काफी लंबी सौदेबाजी हुई और आखिर में सौदागर ऊंट खरीद कर घर ले आया।घर पहुंचने पर  सौदागर ने अपने नौकर को ऊंट का कजावा ( काठी) निकालने के लिए बुलाया। कजावे के नीचे नौकर को एक छोटी सी मखमल की थैली मिली जिसे खोलने पर उसे कीमती हीरे जवाहरात भरे होने का पता चला।नौकर चिल्लाया,"मालिक आपने ऊंट खरीदा,लेकिन देखो, इसके साथ क्या मुफ्त में आया है?" सौदागर भी हैरान था,उसने अपने नौकर के हाथों में हीरे देखे जो कि चमचमा रहे थे और सूरज की रोशनी में और भी टिम टिमा रहे थे। सौदागर बोला:"मैंने ऊंट ख़रीदा है,न कि हीरे,मुझे उसे फौरन वापस करना चाहिए।"नौकर मन में सोच रहा था कि मेरा मालिक कितना बेवकूफ है। वह बोला:"मालिक किसी को पता नहीं चलेगा।"पर सौदागर ने एक न सुनी और वह फौरन बाज़ार पहुंचा और दुकानदार को मख़मली थैली वापिस दे दी। ऊंट बेचने वाला बहुत ख़ुश था वह बोला,"मैं भूल ही गया था कि अपने कीमती पत्थर मैंने कजावे के नीचे छुपा के रख दिए थे।अब आप इनाम के तौर पर कोई भ

habits for givers

एक दिन आदमी जंगल से गुजर रहा था। तब उसने देखा की एक लोमड़ी बड़ी ही बुरी हालत वहा पे पड़ा था।वो चल फिर भी नहीं सकता था। उसको बड़ी ही दया आई, वह सोच ही रहा था की इस हालत में ये बिचारा खाना कैसे खाएगा , की तभी वह पे एक शेर शिकार कर के आया और जब शेर खाके लोमड़ी के लिए शिकार छोड़ के चला गया। बाकि बचा हुआ बचा हुआ लोमड़ी खाया। वो आदमी समज गया।  वह दूसरे दिन आया. दूसरे  शेर लोमड़ी के लिए शिकार छोड़ के चला गया। इस प्रसंग से उस आदमी ने ये प्रेरणा ली की जब हज़ार हाथ वाला बैठा है तो हमें चिंता करने की क्या आवश्यकता है? वह घर पे गया और बिना कुछ काम काज किये वह एक कोने में बेथ गया। इस आशा से की भगवान खाना भेजेंगे। किन्तु ऐसा हुआ नहीं और कुछ दिन में वो हाड़पिंजर बन गया। तब गुस्से में उसने भगवन से शिकायत की कि, " तूने उस लोमड़ी  खाना भेजा जब की वो लोमड़ी न तुम्हे जानती है और न ही तुम्हारे पूजा करती है। और मैं तुम पे इतना विश्वास  करता हु  भरोसे मैंने अपना सारा काम काज छोड़ दिया फिरभी  भूखा मार रहे हो?" तभी एक आवज आई की, "यही पे तेरी भूल है। तुमने  लोमड़ी को देखा शेर को नहीं देखा।मैने उस लोमड़ी

benefits of kindness

मैं जब  छोटा था तब मैं बहुत स्वार्थी था, मै हमेशा अपने विषय में ही सोचता था। हमेशा अपने लिए सर्वश्रेष्ठ चुनता था।      धीरे-धीरे, सभी दोस्तों ने मुझे छोड़ दिया और अब मेरे कोई दोस्त नहीं थे। मैंने नहीं सोचा था कि यह मेरी गलती थी, और मैं दूसरों की आलोचना करता रहता था। लेकिन मेरे पिता ने मुझे जीवन में मदद करने के लिए 3 दिन में 3 संदेश दिए।      एक दिन, मेरे पिता ने हलवे के 2 कटोरे बनाये और उन्हें मेज़ पर रख दिया।      एक के ऊपर 2 बादाम थे, जबकि दूसरे कटोरे में हलवे के ऊपर कुछ नहीं था।      फिर उन्होंने मुझे हलवे का कोई एक कटोरा चुनने के लिए कहा, क्योंकि उन दिनों तक हम गरीबों के घर बादाम आना मुश्किल था.... मैंने 2 बादाम वाले कटोरे को चुना!       मैं अपने बुद्धिमान विकल्प / निर्णय पर खुद को बधाई दे रहा था, और जल्दी जल्दी मुझे मिले 2 बादाम हलवा खा रहा था।       परंतु मेरे आश्चर्य का ठिकाना नही था, जब मैंने देखा कि की मेरे पिता वाले कटोरे के नीचे 8 बादाम छिपे थे!      बहुत पछतावे के साथ, मैंने अपने निर्णय में जल्दबाजी करने के लिए खुद को डांटा।       मेरे पिता मुस्कुराए और मुझे यह याद रखना सिख

COMMITMENT

  एक युवा युगल के पड़ोस में एक वरिष्ठ नागरिक युगल रहते थे , जिनमे पति की आयु लगभग अस्सी वर्ष थी , और पत्नी की आयु उनसे लगभग पांच वर्ष कम थी।  युवा युगल उन वरिष्ठ युगल से बहुत अधिक लगाव रखते थे , और उन्हें दादा दादी की तरह सम्मान देते थे।  इसलिए हर रविवार को वो उनके घर उनके स्वास्थ्य आदि की जानकारी लेने और कॉफी पीने जाते थे।  युवा युगल ने देखा कि हर बार दादी जी जब कॉफ़ी बनाने रसोईघर में जाती थी तो कॉफ़ी की शीशी के ढक्कन को दादा जी से खुलवाती थी।  इस बात का संज्ञान लेकर युवा पुरुष ने एक ढक्कन खोलने के यंत्र को लाकर दादी जी को उपहार स्वरूप दिया ताकि उन्हें कॉफी की शीशी के ढक्कन को खोलने की सुविधा हो सके।  उस युवा पुरुष ने ये उपहार देते वक्त इस बात की सावधानी बरती की दादा जी को इस उपहार का पता न चले ! उस यंत्र के प्रयोग की विधि भी दादी जी को अच्छी तरह समझा दी।  उसके अगले रविवार जब वो युवा युगल उन वरिष्ठ नागरिक के घर गया तो वो ये देख के आश्चर्य में रह गया कि दादी जी उस दिन भी कॉफी की शीशी के ढक्कन को खुलवाने के लिए दादा जी के पास लायी ! !! युवा युगल ये सोचने लगे कि शायद दादी जी उस यंत्र का प्र

point of view

 एक शहर में एक धनी व्यक्ति रहता था, उसके पास बहुत पैसा था। और उसे इस बात पर बहुत घमंड भी था। एक बार किसी कारण से उसकी आँखों में इंफेक्शन हो गया।  आँखों में बुरी तरह जलन होती थी, वह डॉक्टर के पास गया लेकिन डॉक्टर उसकी इस बीमारी का इलाज नहीं कर पाया। सेठ के पास बहुत पैसा था उसने देश विदेश से बहुत सारे नीम- हकीम और डॉक्टर बुलाए। बड़े डॉक्टर ने बताया की आपकी आँखों में एलर्जी है। आपको कुछ दिन तक सिर्फ़ हरा रंग ही देखना होगा और कोई और रंग देखेंगे तो आपकी आँखों को परेशानी होगी।  अब क्या था, सेठ ने बड़े बड़े पेंटरों को बुलाया और पूरे महल को हरे रंग से रंगने के लिए कहा। वह बोला- मुझे हरे रंग से अलावा कोई और रंग दिखाई नहीं देना चाहिए मैं जहाँ से भी गुजरूँ, हर जगह हरा रंग कर दो। घर तो हरे रंग का हो गया किन्तु जब वे बहार जाते थे तब उनको दूसरा रंग देखना ही पड़ता था। इस  ने राजा से आज्ञा ले के पुरे नगर में भी हरा रंग लगवा दिया।  इस काम में बहुत पैसा खर्च हो रहा था लेकिन फिर भी सेठ की नज़र किसी अलग रंग पर पड़ ही जाती थी क्यूंकी पूरे नगर को हरे रंग से रंगना को संभव ही नहीं था, सेठ दिन प्रतिदिन पेंट करा

don't follow blindly

  फोर्ड कंपनी के संस्थापक हेनरी फोर्ड एक बार एक बुक स्टॉल में गए। जहा उन्होंने एक बुक देखि। जिसका नाम था कम समय में कैसे ज्यादा पैसे कमाए जाये। हेनरी फोर्ड वो बुक देखने लगे। तभी बुक स्टाल के  मालिक ने कहा की, इसका लेखक यही पर है क्या आप उनसे मिलना चाहेंगे? हेनरी फोर्ड ने मिलने की इच्छा जताई, तभी वहा पे उस बुक का राइटर आया। हेनरी फोर्ड ने उसे सर से लेके पाव तक देखा। वह बहुत बुरे हाल में था उसका कोट और हैट बहुत ही पुराणी और फटी हुए थी। हेनरी फोर्ड ने तुरंत  वह बुक निचे रखदी। बुक स्टॉल वाले ने जब उसका कारन पूछा तो हेनरी फोर्ड ने उसक उत्तर देते हुए कहा की, "जिसके नुस्खेसे वह स्वयं ही कुछ हासिल नहीं कर पाया उससे मुझे क्या फायदा होगा ?" फिर वह उस राइटर की और देखते हुए  कहा के,  वैसे तुम कैसे जाओगे अपने घर तुम्हारे पास तो कार नहीं होगी न?" उस राइटर ने कहा की, "नहीं में तो मेट्रो से चला जाऊंगा।" तब हेनरी फोर्ड ने कहा की मुझसे आके मिलना मेरे पास कई कार है मैं तुम्हे सस्ते में दिलवा दूंगा। लोगो को वह विचार मत दो जिससे तुम कुछ हासिल नहीं कर पाए।" यह कहानी उन सभी को स

mantra for success

 एक लोक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार पुराने समय में एक शिष्य ने अपने गुरु से कहा कि मुझे जल्दी से जल्दी सफलता चाहिए। कोई ऐसा तरीका बताएं, जिससे हर समस्या जल्दी से जल्दी हल हो सकती है।  गुरु ने शिष्य से कहा कि ठीक है मैं एक ऐसा तरीका बता दूंगा, जिससे सारी दिक्कतें दूर की जा सकती हैं। लेकिन, पहले तुम मेरी बकरी को खूंटे से बांध दो। गुरु ने बकरी की रस्सी शिष्य के हाथ में पकड़ा दी।शिष्य ने कहा ठीक है। उसको तो ये काम बहुत ही सरल लग रहा था। मगर बकरी किसी से भी आसानी से काबू में नहीं आती थी। यह बात शिष्य नहीं जनता था।  शिष्य ने जैसे ही बकरी को खूंटे से बांधने लगा, वह उछल-कूद करने लगी। शिष्य को बहुत ही गुस्सा आ रहा था। वह बकरी को जितना ज्यादा कस के बांधने का प्रयास कर रहा था, उतनी ही ज्यादा बकरी उछल कूद कर रही थी। और वह शिष्य की पकड़ में नही आ रही थी। बहुत कोशिश करने के बाद भी बकरी काबू में नहीं आ रही थी। शिष्य ने जितना सोचा था उतना ये आसान काम नहीं था। ।थोड़ी ही देर में वह थक हर के बेठ गया। तब उसको उसके गुरु की सीखाइ बात याद आई।  के हर काम बल से नहीं होता , जो काम बल से करना असंभव हो वो बुद्धि

lord krishna and management

   भगवान कृष्ण का पूरा जीवन मैनेजमेंट के नजरिए से आदर्श है। श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व से जुड़ी ज्यादातर चीजें, जो उनके जीवन का प्रमुख हिस्सा रहीं, वे सब उन्हें उपहार में मिली थीं। इन सभी चीजों के बारें में भागवत, पद्मपुराण, ब्रह्मवैवर्तपुराण, गर्ग संहिता जैसे ग्रंथों में बताया गया है। अलग-अलग ग्रंथों में इन चीजों के संबंध अलग-अलग तरीके से उल्लेख किया गया है। जैसे, नंदबाबा से बांसुरी, राधा से मोरपंख। ये चीजें श्रीकृष्ण की पहचान हैं। ये बताती हैं कि इंसान को जहां से भी कुछ अच्छा मिल सके उसे अपने जीवन में उतारना चाहिए। दूसरों की अच्छी आदतों को सीखना, ज्ञान लेना और अपनों से मिली चीजों को सम्मान देना चाहिए। बांसुरी श्रीकृष्ण को उनके जीवन में कई उपहार मिले थे और अधिकतर उपहार हमेशा उनके साथ ही रहे। नंद बाबा ने बालकृष्ण को बांसुरी दी थी। बचपन का ये उपहार उन्होंने हमेशा अपने साथ ही रखा। जीवन प्रबंधन- बांसुरी अंदर से खोखली होती है, लेकिन अपनी मीठी आवाज से दूसरों के मन मोह लेती है। बांसुरी की सीख यह है कि हमें अपने आचरण को अहंकार, लालच, क्रोध जैसी बुराइयों से खाली रखना चाहिए और सभी मीठा बोलना चाहिए

Time is Money

    बहुत बर्षो पहेले की एक बात है। एक आदमी को पैसे कमाने का जूनून चढ़ा। और वो ऐसे पैसे कमाने में डूबा की दिन महीने  महीने वर्षो में कब बदल गए पता ही चला। और देखते ही देखते उसके पास अपार धन और समृद्धि हो गई। वो गांव का सबसे धनवान वयक्ति हो गया। एक दिन उसने देखा की उसके शयन कक्ष में कोई खड़ा है। उसने पूछा, "कोण हो तुम?"  उस व्यक्ति ने कहा की, "में यम दूत हु और तुम्हारा जीवन यही पे समाप्त हो गया है। अब तुम्हे मेरे साथ आना पड़ेगा।" वह व्यक्ति गभरा गया उसने कहा, "मेने तो अभी अपना जीवन जिया ही नहीं है। मुझे तो अभी बहुत काम बाकि है, कई सपने बाकि है। में तो अब तक केवल धन कमाने में ही व्यस्त था।"  यमदूत ने कहा, "ये सब में नहीं जनता मुझे आदेश मिला है के मै तुम्हे लेके आउ।    बहुत बिनती कर ते हुए कहा की, "तुम मेरे आधी सम्पति लेलो मगर मुझे केवल एक महीना देदो। मगर यमदूत नहीं माना। तब उसने कहाकि, "तुम मेरी पुरि सम्पति लेलो मुझे एक दिन देदो।" मगर फिर भी यमदूत नहीं मना" बहुत बिनती  करनेके बाद यमदूत ने केवल एक वाक्य लिखने का समय दिया। और उस वयक्ति ने

story of kfc owner

  अगर कोई आपसे ये कहे की एक बच्चा जो गरीब परिवार से है। और ऊपर से जिसके सर पर से केवल ५ वर्ष के उम्र में ही पिता का साया उठ गया हो, और उसके सर पे अपने छोटे भाई बहन और माँ की जिम्मेदारी आ गई हो।  और अपने  जीवन में ४० से भी ज्यादा समय तक अगल अगल क्षेत्र में से या तो निकल  दिया गया हो। या तो उसने खुद छोड़ दी हो। क्या आप सोच सकते है की जो एक ही क्षेत्र में १००८ बार रेजिस्ट हुआ हो वो आदमी अपने  कभी सफल हो पायेगा?  हम कहेंगे नहीं, ये तो हो ही नहीं सकता की ऐसा कोई भी आदमी अपने जीवन में सफल तो दूर पर कभी एक नार्मल लाइफ नहीं जी पाया होगा। और अगर मैं ये ःकहु की वो केवल सफल ही नहीं मगर एक ब्रांड बना है। एक ऐसा ब्रांड जो पुरे दुनियामे इतना प्रसिद्ध है की शायद ही कोई हो जो इसको न जनता हो तो?  जी है उस आदमी का नाम है  Colonel Harland Sanders  और  का नाम है,  KFC  ( Kentucky fried chicken ) कर्नल सैंडर्स का जन्म 9 सितम्बर 1890 को  अमरीका के इंडियाना प्रान्त के हेनरिविले नामक कस्बे में एक गरीब परिवार में हुआ था।  उनके पिता विल्बर डेविड कसाई थे और माता गृहणी। वे तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। उनके पिता

Who is your true friend?

एक व्यक्ति के तीन मित्र थे। एक मित्र  सदैव उसके साथ रहता था। एक पल, एक क्षण भी उससे अलग नहीं होता था। दूसरा मित्र ऐसा था जो रोज़ सुबह शाम मिलता था। और तीसरा मित्र ऐसा था जो बहुत दिनों में कभी कभी मिलता था।  एक दिन कुछ ऐसा हुआ की उस व्यक्ति को अदालत में जाना पड़ा और किसी कारणवश किसीको गवाह के रूपमे लेके जाना था।  अब वह व्यक्ति सबसे पहले अपने उस मित्र के पास गया जो सदैव उसके साथ में रहता था। उससे कहा की, 'हे मित्र क्या तुम मेरे साथ अदालत में मेरा गवाह बन चल सकते हो?' तो उस मित्र ने का, ' क्षमा करना मित्र किन्तु आज मुझे बहोत सारा काम है, एक क्षण की भी फुर्सद नहीं है। अन्यथा में अवश्य ही तुम्हारे साथ आता।'  उस व्यक्ति ने सोच की यह मित्र  हमेशा मेंरा साथ देता था। आज जब मुझे उसकी सबसे ज्यादा आवश्कता है तभी वो मेरा साथ नहीं दे रहा तो दूसरे मेरा क्या साथ देंगे? फिरभी हिमंत कर के वह अपने दूसरे मित्र के पास गया जो उससे रोज सुबह शाम मिलता था। और अपनी समस्या सुनाई। दूसरे मित्रने कहा की, 'में तुम्हारे साथआऊंगा किन्तु अदालत के दरवाजे तक ही आऊंगा। अंदर तक नहीं आऊंगा। वह व्यक्ति बोलै

vastav me sukhi kon?

एक भिखारी किसी किसान के यहाँ भीख मांगने गया।  किसान की स्त्री घर में थी, उसने चने की रोटी बना रखी थी उसी वक्त किसान घर आया और उसकी स्त्री ने उसके हाथ पेर धुलवाए और उसको खाना परोसा।  उस स्त्री ने एक मुठी चना भिखारी को दिए और वह चना ले के चला गया. रस्ते में भिखारी ने सोचा की, 'हमारा भी कोई जीवन है दिन भर कुत्तो की तरह मानगो और घर जाके खुद बना के खाओ।  वह सोच ने लगा की उस  किसान को देखो कितना सुन्दर घर है, घर में स्त्री है, बच्चे है खुद अनाज उगता है. बीवी बच्चो के साथ मिलके खता है. वास्तव में तो सुखी वो किसान ही है। ' उधर वह किसान अपने पत्नी से कह रहा था की, 'हमारा बैल बहुत बूढ़ा हो गया है, अब वह किसी तरह काम नहीं देता, यदि कही से कुछ पैसो का इंतजाम हो जाये तो इस साल का काम चल जाये।  कल महाजन के पास जाउगा और कुछ पैसे उधर मांग लूंगा।' दूसरे दीन वह महाजन के पास गया और बहुत बिनती की, हाथ पेअर जोड़ने के बाद कुछ पैसे किसान को दिए।' रुपये ले के किसान अपने घर पे जा रहा था तब वो सोचने लगा की, 'हमारी  भी कोई जिंदगी है? पांच रुपये भी घर पे नहीं है। उस महाजन के पास सेकड़ो रूपए ह