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benefits of kindness



मैं जब  छोटा था तब मैं बहुत स्वार्थी था, मै हमेशा अपने विषय में ही सोचता था। हमेशा अपने लिए सर्वश्रेष्ठ चुनता था।
     धीरे-धीरे, सभी दोस्तों ने मुझे छोड़ दिया और अब मेरे कोई दोस्त नहीं थे। मैंने नहीं सोचा था कि यह मेरी गलती थी, और मैं दूसरों की आलोचना करता रहता था। लेकिन मेरे पिता ने मुझे जीवन में मदद करने के लिए 3 दिन में 3 संदेश दिए।
     एक दिन, मेरे पिता ने हलवे के 2 कटोरे बनाये और उन्हें मेज़ पर रख दिया।
     एक के ऊपर 2 बादाम थे, जबकि दूसरे कटोरे में हलवे के ऊपर कुछ नहीं था।
     फिर उन्होंने मुझे हलवे का कोई एक कटोरा चुनने के लिए कहा, क्योंकि उन दिनों तक हम गरीबों के घर बादाम आना मुश्किल था.... मैंने 2 बादाम वाले कटोरे को चुना!
      मैं अपने बुद्धिमान विकल्प / निर्णय पर खुद को बधाई दे रहा था, और जल्दी जल्दी मुझे मिले 2 बादाम हलवा खा रहा था।
      परंतु मेरे आश्चर्य का ठिकाना नही था, जब मैंने देखा कि की मेरे पिता वाले कटोरे के नीचे 8 बादाम छिपे थे!
     बहुत पछतावे के साथ, मैंने अपने निर्णय में जल्दबाजी करने के लिए खुद को डांटा।
      मेरे पिता मुस्कुराए और मुझे यह याद रखना सिखाया कि,
    "आपकी आँखें जो देखती हैं वह हरदम सच नहीं हो सकता, उन्होंने कहा कि यदि आप स्वार्थ की आदत की अपनी आदत बना लेते हैं तो आप जीत कर भी हार जाएंगे।"
     अगले दिन, मेरे पिता ने फिर से हलवे के 2 कटोरे पकाए और टेबल पर रखे एक कटोरा के शीर्ष पर 2 बादाम और दूसरा कटोरा जिसके ऊपर कोई बादाम नहीं था।
     फिर से उन्होंने मुझे अपने लिए कटोरा चुनने को कहा। इस बार मुझे कल का संदेश याद था, इसलिए मैंने शीर्ष पर बिना किसी बादाम कटोरी को चुना।
     परंतु मेरे आश्चर्य करने के लिए इस बार इस कटोरे के नीचे एक भी बादाम नहीं छिपा था! 
     फिर से, मेरे पिता ने मुस्कुराते हुए मुझसे कहा,  
"मेरे बच्चे, आपको हमेशा अनुभवों पर भरोसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि कभी-कभी, जीवन आपको धोखा दे सकता है, या आप पर चालें खेल सकता है। स्थितियों से कभी भी ज्यादा परेशान या दुखी न हों, बस अनुभव को एक सबक अनुभव के रूप में समझें, जो किसी भी पाठ्यपुस्तकों से प्राप्त नहीं किया जा सकता है।"
     तीसरे दिन, मेरे पिता ने फिर से हलवे के 2 कटोरे पकाए।
     पहले 2 दिन की ही तरह, एक कटोरे के ऊपर 2 बादाम, और दूसरे के शीर्ष पर कोई बादाम नहीं। मुझे उस कटोरे को चुनने के लिए कहा जो मुझे चाहिए था।
     लेकिन इस बार, मैंने अपने पिता से कहा, पिताजी, आप पहले चुनें, आप परिवार के मुखिया हैं और आप परिवार में सबसे ज्यादा योगदान देते हैं । आप मेरे लिए जो अच्छा होगा वही चुनेंगे।
      मेरे पिता मेरे लिए खुश थे।
उन्होंने शीर्ष पर 2 बादाम के साथ कटोरा चुना, लेकिन जैसा कि मैंने अपने  कटोरे का हलवा खाया!  कटोरे के हलवे के एकदम नीचे 4 बादाम और थे।😊
      मेरे पिता मुस्कुराए और मेरी आँखों में प्यार से देखते हुए उन्होंने कहा,  
  "मेरे बच्चे, तुम्हें याद रखना होगा कि, जब तुम भगवान पर सब कुछ छोड़ देते हो, तो वे हमेशा तुम्हारे लिए सर्वोत्तम का चयन करेंगे।
    और जब तुम दूसरों की भलाई के लिए सोचते हो, अच्छी चीजें स्वाभाविक तौर पर आपके साथ भी हमेशा होती रहेंगी ।"

ये तीन दिन के तीन पाठ ने मेरा जीवन बदल दिया। अब अपने साथ -साथ अपनो के विषय में  भी सोचता हु। में पूरी महेनत करता हु और सफलता न मिलने पर कभी खुद को या भगवान को नहीं कोसता, क्योकि मुझे पता है की भगवान ने जो भी किया वो मेरे भले के लिए ही किया होगा। इससे ये फायदा हुआ की में कोईभी परिस्थितिमें खुश रहता हु। और दुसरो के विषय में सोचने  कारन मैं लोगो में भी प्रिय हो हु। आज समाज में मेरा नाम और इज़्ज़त है। और दुसरो की मदद कर ने में मुझे जो ख़ुशी मिल रही है वो अवर्णीय है। 

 परोपकारी बनें, परोपकारी बनने में ही लाभ है। बड़ों का सम्मान करते हुए उन्हें पहले मौका व स्थान दे, बड़ों का आदर-सम्मान करोगे तो कभी भी खाली हाथ नही लौटोगे ।

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