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Social Media Se Naye Samaj Ki Aur Ek Kadam In Hindi

social media से सतकार्य की और एक कदम। 

aaj ye bahut hi jaruri ho gaya hai ki social media ka upyog ham bahot hi sambhal ke kare. samaj me positivity lane ya negativity


 दोस्तों, आज मैने एक Whatsapp पे एक स्टोरी पढ़ी। ये कोई काल्पनिक नहीं थी, पर एक सच्ची घटना पर आधारित है। उसको पढ़ कर बहुत आश्चर्य के साथ साथ एक सुकून भी मिला। 

social media का idea जब किसी को आया होगा। तो उन्होंने यही सोचा होगा की ये इंसान के लिए बहुत ही उपयोगी होगा। पर हम भी इंसान है।अच्छे को बिगाड़ने में हम माहिर है। क्योकि आज social media, facebook, Twitter, Whatsapp,internet वग़ैरा का उपयोग अच्छे से ज्यादा बुरे कार्य के लिए अधिक होता है। 

आज हम न्यूज़ में रोज़ किसी न किसी से फ्रॉड या blackmailing के किस्से हम लगभग रोज़ सुनते है। ये दिन पर दिन बढ़ रहे है। हम माने या न माने पर social media पे एक पूरा negativity का मानो कब्ज़ा सा है। लोग अच्छे अच्छे message या कोट्स तो रोज़ सुबह भेजते है, पर उसका पालन करना नहीं जानते। 

ऐसे में इस सच्ची स्टोरी ने मेरे दिल को एक सुकून के साथ एक उम्मीद भी दी। ज़माना इतना भी ख़राब नहीं जितना हम रोज़ सुबह उठ के mobile में देख ते है। 

मैं ज्यादा प्रस्तावना न देते हुए ये स्टोरी शेयर करती हूँ। 

एक छोटे से शहर की ये बात है। वहा पे एक युवान रोज़ एक होटल में से ५ टिफ़िन पैक कर के वहा के भिखारियों को बाँट देता था। ये उसका  रोज़ का क्रम था। एक भी दिन ऐसा नहीं गुजरता था जब वो न आया हो। यदि वो ना आने वाला हो तब भी वो कुछ न कुछ इंतज़ाम करवा देता था। 

ये बात  उस होटल वाले को और उस भिखारियों को बहुत अज़ीब लगी। उन्होंने उस लड़के को एक दिन पूछने पर उसने जवाब दिया की,'मेरे पिताजी कहा करते थे की किसी को खाना खिलाने के बाद यदि हम खाए तो खाना प्रसाद बन जाता है। वो और भी मीठा लगता है। मै बच्चपन से ही मेरे पिताजी साथ लोगो को खाना बाँटने  का काम  करता हूँ। आज मेरे पिताजी नहीं है तो मैं ये काम अकेले ही करता हूँ। 

ये रोज़ का एक क्रम बन गया था। वो रोज़ शाम को आता , होटल से पाँच टिफ़िन बंधवाता भिखरियों को दे कर चुपचाप चला जाता। अब भिखारी भी उनको  पहचान गए था।  वो लोग भी रोज़ उस लड़के के इंतज़ार में रहते थे। 

 एक दिन की बात है। काफी इंतज़ार के बाद भी वो लड़का नहीं आया। सब को बड़ा आश्चर्य हुआ। वो लड़का एक दिन न आना तो दूर, पर कभी late भी नहीं आता था। वो आज क्यों नहीं आया? सब  के मन में यही सवाल उमट रहा था। 

ये बात अब रोज़ की हो गयी। होटेल वाला और भिखारी उस लड़के की राह देखते पर वो नहीं आता। 

एक दीन एक बहुत सी अजीब सी बात देखने को मिली। वो लड़का जिस भिखारी को रोज़ टिफ़िन देता था। उनमे से कुछ भिखारी उस होटल पे आए और मिलकर दूसरे एक भिखारी को टिफिन भर के दे दिया।  उसके पैसे  चुकाने लगे।  

होटेल वाले को ये बात बहुत ही अजीब सी लगी। उससे रहा नहीं गया। उसने भिखारियों को ऐसा करने पर पूछा। 

उन भिखारियों ने कहा की, ' हम को रोज़ जो लड़का टिफ़िन बंधवा के देता था, उसकी एक एक्सीडेंट मे मृत्यु हुई है। हम दो चार मित्र ने मिल कर उस लड़के को श्रद्धांजलि के रूप में, रोज़ एक टिफिन की सेवा कर ने का फ़ैसला किया है। हम को रोज़ जो भी भीख मिलेगी उससे हम ये कार्य करेंगे। उस  कार्य शुरू रख कर ही हम उसको सच्ची श्रद्धांजलि दे सकेंगे।'

उन  भिखारियों की बात सुन कर होटलवाले को क्या बोलना चाहिए ये नहीं सूजा, पर क्या करना चाहिए ये सूज गया। उन्होंने उन भिखारियों को कहा की, ' उस लड़के ने शुरू की हुई टिफ़िन की सेवा मेरी और से आज से चालू रहेगी। उसके लिए आप को पैसा खर्च करने की जरुरत नहीं है।' 

 तब उस भिखारी ने कहा की, ' साहेब हम सब  बहुत ही छोटे लोग है। समाज सेवा और लोकसेवा जैसे बड़े कार्य करने की हमारी औक़ात नहीं है। ज्यादा से ज्यादा हम  मिलकर एक दूसरे को ऐसी मामूली सी सेवा कर सकते है। ये कृपया हमें करने दे। उस युवान से हमें ये प्रेरणा मिली है, उस प्रेरणा का दिया जलता रहे इसलिए हम अपने अंतिम साँस तक ये कार्य करते रहेंगे।' 

होटेल वाले ने उनकी बात सुन के कहा की, ' उस युवान को श्रद्धांजलि देने के लिए आपने जिस दिए को जलाया हुआए है, आज से मैं भी उसमे अपनी और से थोड़ा सा तेल डालता हूँ। आज से मैं रोज़  पाँच गरीब लोगो को टिफिन की सेवा दूँगा। 

दोस्तों, हम सब ने बीमारियों के चेप तो बहुत देखे। कोरोना काल में  उसके दुष्प्रभाव को पुरे विश्व ने बहुत ही करीब से देखा। अगर ऐसे सतकार्य के चेप यदि हमारे समाज को भी लग जाये, तो चाहे जितनी भी भयंकर बीमारीं या समस्या क्यों न आ जाये। हम सब मिलकर उसको बहुत ही आसानी से पार कर सकते है। 

जरुरी नहीं की हम बहार जा कर ही अच्छे काम कर सकते है। आज कल इंटरनेट की दुनिया से पूरा विश्व ही हमारे एक  मोबाइल में समा गया है।

जरुरत है की हम social media का उपयोग positivity फैलाने के लिए करे। आज से ही हमें हर पल सतर्क रहना पड़ेगा। ऐसी अच्छी बाते यदि हमारे आस पास होती है  तुरंत उसको share करना चाहिए। पर कुछ भी नेगेटिव पोस्ट कभी भी फोरवोर्ड नहीं करनी चाहिए। फिर उसमे कितनी भी सच्चाई क्यों ना हो। 

रोज़ सुबह उठकर हमें एक अच्छी और  प्रेरणादायी खबरे पढ़ने की आदत डालनी चाहिए। ऐसे कई Facebook पर ग्रुप है। उसको ज्वाइन कर के हम अपने जीवन को एक अच्छी दिशा दे सकते है। अगर अच्छी न्यूज़ और post पढ़ कर दुनिया में शेयर करे तो उसका चेप हमारी समस्त मानव जाती के लिए एक  वरदान सा साबित होगा। 

आइये हम सब उस चेप को अपनाये और पुरे विश्व को एक नवयुग की तरफ ले जाये। जहा पे केवल और केवल सतकार्य के ही चेप हो। 

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